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Saturday, June 10, 2017

हीरा तो चमके बाळू रेत म।

सभी दोस्तो को  मेरा नमस्कार आज आपके सामने  एक राजस्थानी कविता पेश कर रहा हूं  लेखक को तो पता नहीं चल पाया पर कविता बड़ी अच्छी  है। जिसने में भी लिखी है। उनको मेरा तह दिल से प्रणाम और धन्यवाद । जिन्होने अपनी कविता में पुरे राजस्थनन की आन बान शान को पिरो दिया है। जो हमें यह बता रही हैं कि  राजस्थान में क्या क्या है। ? कविता राजस्थानी भाष में  है और मेरे अंचल से सम्बंध रखती है। इसलिए मेरा आपसे शेयर करने को मन बन गया इस कविता का सारा श्रेय जिन्होने लिखी है उनको जाता है।  
इसमें कवि बताता  है उसने पुरे विश्व में घुम कर देख लिया पर यहां  राजस्थान की बालू रेत में जो है वो उसे कही भी नही देखने को मिला  
उत्तर देख्यो दिख्खणं देख्यो
 देश दिसावर सारा देख्या, 
पणं हीरा तो चमके है बालू रेत में।
मोतीडा भलके है म्हारा देस में।
रणबंका सिरदार अठै है।
मोटा साहूकार अठै है।
तीखोडी तलवार अठै है।
भालां री भणकार अठै है।
साफा छुणगादार अठै है।
नितरा तीज तिंवार अठै है।
बाजर मोठ जंवार अठै है।
मीठोडी मनवार अठै है।
अन धन रा भंडार अठै है।
दानी अर दातार अठै है।
कामणगारी नार अठै है।
मुंछ्यांला मोट्यार अठै है।
पो पाटी परभात अठै है।
तारां छाई रात अठै है।
अर,तेजो तो गावे है करसा खेत में।
हीरा तो चमके है------------।
झीणो जैसलमेर अठै है।
बांको बीकानेर अठै है।
जोधाणों जालोर अठे है ।
अलवर अर आमेर अठै है।
सिवाणों सांचोर अठै है।
जैपर सांगानेर अठै है।
रुडो रणथंबोर अठै है।
भरतपुर नागौर अठै है।
उदयापुर मेवाड अठै है।
मोटो गढ चित्तोड अठै है।
झुंझनूं सीकर शहर अठै है।
कोटा पाटणं फेर अठै है।
आबू अर अजमेर अठै है।
छोटा मोटा फेर अठै है।
अर,डूगरपुर सुहाणों वागड देस में।
हीरा तो चमके है--------------------।

                                                                    पाणीं री पणिहार अठै है।
                                                                     तीजां तणां तिंवार अठै है।
                                                                     रुपलडी गणगौर अठै है।
                                                                     सारस कुरजां मोर अठै है।
                                                                      पायल री झणकार अठै है।
                                                                     चुडलां री खणकार अठै है।
                                                                     अलगोजां री तान अठै है।
                                                                     घूंघट में मुसकान अठै है।
                                                                      खमां घणीं रो मान अठै है।
                                                                     मिनखां री पहचाण अठै है।
                                                                      मिनखां में भगवान अठै है।
                                                                      घर आया मेहमान अठै है।
                                                                        मीठी बोली मान अठै है।
                                                                     दया धरम अर दान अठै है।
                                                       अर मनडा तो रंगियोडा मीठा हेत में।
                                                                 हीरा तो चमके है बालू रेत में।
                                                               मोतीडा भलके है म्हारा देस में।
   गौरी पुत्र गणेश अठै है।
मीरां बाई रो देश अठै है।
मोटो पुष्कर धाम अठै है।
सालासर हनुमान अठै है।
रूणीचे रा राम अठै है।
गलता तीरथ धाम अठै है।
महावीर भगवान अठै है।
खाटू वाला श्याम अठै है।
चारभुजा श्रीनाथ अठै है।
मेंहदीपुर हनुमान अठै है।
दधिमती री गोठ अठै है।
रणचंडी तन्नोट अठै है।
करणी मां रो नांव अठै है।
डिग्गीपुरी कल्याण अठै है।
गोगाजी रा थान अठै है।
सेवा भगती ग्यान अठै है।
अर कितरो तो बखाणूं मरुधर देस नें।
हीरा तो चमके है--।
जौहर रा सैनाणं अठै है।
गढ किला मैदान अठै है।
हरिया भरिया खेत अठै है।
मुखमल जेडी रेत अठै है।
मकराणा री खान अठै है।
मेहनतकश इंशान अठै है।
पगडी री पहचाणं अठै है।
ऊंटां सज्या पिलाणं अठै है।
चिरमी घूमर गैर अठै है।
मेला च्यारूंमेर अठै है।
सीधी सादी चाल अठै है।
गीतां में भी गाल अठै है।
सीमाडे री बाड अठै है।
बेरयां रा शमशाणं अठै है।
तिवाडी रो देश अठै है।
ऐडी धरती फेर कठै है ।
साची केवूं झूठ कठै है ।
समझौ तो बैंकूठ अठै है।
अर आवो नीं पधारो म्हारा देश में।
हीरा तो चमके है बालू रेत में।
मोतीडा झलके है म्हारा देश में।

दोस्तो कुछ कलिष्ट शब्दो के हिन्दी अर्थ मैने अपनी तरफ से लिखे है ताकि आपको पढ़ने में कोई कठिनाई न हो सके । फिर भी कुछ समझ में नही आये तो पुछ सकते है।  +91 9829277798 Surendra Singh Bhamboo
दिख्खण  --  दक्षिण
मोटा साहूकार   -- ज्यादा पैसे वाला  जो ब्याज पर पैसे देता है।
तिखोड़ी  --  तेजधार वाली
नितरा --- रोजका
तिंवार -- त्योहार
पोह पाटी -- सुबह का उगता सूरज
सिवांणो -- इलाका
मोटो गढ़ -- ऊचों विशाल गढ़
खंमा घणी --  राम राम नमस्कार
थान  - मन्दिर स्थान


मिनखां --  मनुष्य
सैनाण -- निशानी
जेड़ी -- जैसी
पिलाण --  ऊंट पर रखा जाने वाला लकड़ी का ढ़ाचा जिसके उपर गाड़ी जोड़ते है। 
च्यारूमेर - हर तरफ
 

 31 दिसम्बर लाईन का खात्मा सबके जहन में घुमती रही मोदी की आत्मा

लक्ष्य

Monday, May 22, 2017

शेखावाटी का प्रसिद्ध रसदार खाद्य फल,पील

     शेखावाटी का प्रसिद्ध खाद्य फल  पील.....  पर उससे पहले कुछ गिले सिकवे ... नमस्कार दोस्तों काफी समय से ब्लॉग पर कुछ लिख ही नही पाया कारण आप सभी को पता है फैस बुक और व्हाटस् अप की बढ़ती महता ने ब्लाॅगरो की महत्ता कुछ हद कम कर दी हैं या यू कहें न  के बराबर कर दी है। 
आजकल देखा गया है कि ब्लॉग पर लोगों की  आवाजाही बिलकुल कम होती जा रही  है। इसलिए हमारा यानि ब्लाग् लिखने वालों का मन भी ब्लाग लिखने की बजाय इन्ही सोसल साईटस पर लिखने का ज्यादा करता है। या यू कहें तो अतिश्योक्ति नहीं होगी ! ब्लॉग पर लोगों की  घटती नफरी और फैसबुक और व्हाटस् अप की तरफ लोगो का बढ़ता खिंचाव आरे हो भी कैसे नही जमाने के साथ जो चलना पड़ता है। 
जाळ का फल पील
 ये तो रही कई दिनों से  न लिख पाने की बात अब आज जो मै आपको बताने जा रहा हूं वो हैं
जाळ का फल पील
शेखावाटी का प्रसिद्ध खाद्य फल  पील, पीलू आदि अपने अपने ऐरिये के हिसाब से इसके नाम हैं पर हम तो इसको पील कहते है। जो सिर्फ गर्मी के मोसम में ही खाने को मिलता है जो लू से बचाने में मददगार है  लू अवरोधक है।
क्या आपने खाया है इसे कभी ? किस किस ने खाया है? मैंने तो बहुत बार खाया है और आज भी सुबह सुबह आनंद ले रहा हु इसका। अब  इसके बारे में बतात हूं जितना मुझे पता  हैं जो जानकारी मकुझे बडै बुढ़ो से मिली है उसी के हिसाब से बता रहा हूं
जाळ का फल पील
जाळ का पेड़
को खाकर आनन्द लेते हुए मैं
पील का पेड़  (जाळ) बहुत घना जटिल तरीके से फैला होता है।  इस कारण स्थानीय बोलचाल में इसे जाळ का नाम दिया गया है।ये पेड़  शेखावाटी क्षेत्र (पश्चिमि राजस्थान) में मुख्यतया पाया जाता है। इस गर्मी भरे मौसम में ये ही एक ऐसा पेड़ है जो कि हरा भरा रहता है। और मिठा फल देता  है। ये उमस भरी गर्मी में   शीतल छाव के साथ साथ खाने के लिए मिठे मिठे फल पील,पीलू भी देता  है। इसके लगने का समय अप्रैल माह से जून तक का है।  तेज गर्मी के शुरू होते ही  जाळ के पेड़ पर हरियाली छा जाती है और फल लगना शुरू हो जाते है।इसके फल चने के आकार के मीठे सरदार  होते है।   जिसको हम पील के नाम से जानते है। इसके कई रंग जैसे  लाल, पीले व बैगनी रंग के इन पीलों (फलों ) से एकदम मीठा रस निकलता है। हमारे  रेगिस्तान में इस फल को मेवे की उपमा दी गई है। है और  यह पौष्टिकता से भरपूर होता है और  बड़े बुजर्ग कहते है कि इसे खाने से लू नहीं लगती। साथ ही इसमें कई प्रकार केआर्युरवेदिक  औषधीय गुण भी बताये जाते है। इससेक कई प्रकार की इवाईयां भी बनाई जाती है।
गांवों के बच्चे और औरते इसको पेड़ पर चढ़कर तोड़ते हैं और इसे इकट्ठा करने के लिए लोटे  व केंतली का इस्तेमाल लिया जाता  है। लोटे के मुह पर रस्सी बंधी जाती हैं और फिर लोटे  व केंतली को गले में डाला कर पील तोड़ी जाती है। 
सबसे अंन्त में इसे खाने का तरीका
  इस  मीठे रस भरे इस फल के खाने की सबसे बड़ी खासियत है
दोस्तो इसे खाने का तरीका भी अलग ही है इसे बहुत ही सावधानी के साथ खाना पड़ता है। अन्यथा आपकी जीभ कट सकती है जीभ पर फाले हो जाते है।  इसे आप एक एक करके नहीं खा सकते  अन्यथा अपकी जीभ छिल जाती है। इसे एक साथ आठ-दस दाने मुंह में डाल कर खाना पड़ता है। यानि एक फांका (कई सारे दाने) एक साथ खाना पड़ता है।
 तो दोस्तो जब कभी आपको ये फल खाने को मिले सावधानी से खाये ,और  आशा है आपको ये जानकारी रोचक लगी होगी ।आज के लिए इतना ही फिर मिलते है ब्रेक के बाद.....

 31 दिसम्बर लाईन का खात्मा सबके जहन में घुमती रही मोदी की आत्मा

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